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रंगों के स्थान पर कीचड़, गोबर अथवा वार्निश का प्रयोग करनेवाले असामाजिक तत्वों से रहें सावधान - झुन्ना सिंह


झुन्ना सिंह ने कहा आपसी भाईचारे व प्यार का प्रतीक है होली का पर्व, इस मौके पर रंगों के स्थान पर कीचड़, गोबर अथवा वार्निश का प्रयोग करनेवाले असामाजिक तत्वों से सावधान रहना चाहिए

सासाराम (रोहतास): R1news Desk 

होली पर्व आपसी भाईचारे व प्यार का प्रतीक है। इस दिन मानव अपने सभी मतभेदों को भूलाकर विभिन्न रंगों के रंग में एक सूत्र में बंध जाता है। उक्त बातें शिवसागर प्रखंड मुखिया संघ अध्यक्ष एवं नाद पंचायत मुखिया कमलेश कुमार सिंह उर्फ झुन्ना सिंह ने कहा। 

उन्होंने कहा कि होली भारतवर्ष का एक प्रमुख त्योहार है। सभी लोग इसे बड़े ही उत्साह व सौहार्दपूर्वक मनाते हैं। यह त्योहार लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना उत्पन्न करता है । होली अन्य सभी त्योहारों से थोड़ा हटकर है। इसका संदेश मौज-मस्ती से परिपूर्ण है। मानव समुदाय अपने समस्त दु:खों, उलझनों एवं संतापों को भुलाकर ही इस त्योहार को उसकी संपूर्णता के साथ मना सकता है। 

इस पर्व का विशेष धार्मिक, पौराणिक व सामाजिक महत्व भी है। इस दिन बच्चे, बूढ़े और जवान सभी आपसी बैर भुलाकर होली खेलते हैं। सभी होली के रंग में सराबोर हो जाते हैं। वे एक-दूसरे पर रंग डालते हैं तथा गुलाल लगाते हैं। होली का त्योहार प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। 

परंतु कुछ असामाजिक तत्व प्राय: अपनी कुत्सित भावनाओं से इसे दूषित करने की चेष्टा करते हैं। वे रंगों के स्थान पर कीचड़, गोबर अथवा वार्निश आदि का प्रयोग कर वातावरण को बिगाडऩे की चेष्टा करते हैं। हमें ऐसे असामाजिक तत्वों से सावधान रहना चाहिए। आवश्यकता है कि हम सभी एकजुट होकर इसका विरोध करें ताकि त्योहार की पवित्रता नष्ट न होने पाए। 

होली का पावन पर्व यह संदेश लाता है की मनुष्य अपने ईष्र्या, द्वेष तथा परस्पर वैमनस्य को भुलाकर समानता व प्रेम का दृष्टिकोण अपनाएँ। मौज-मस्ती व मनोरंजन के इस पर्व में हँसी-खुशी सम्मिलित हों तथा दूसरों को भी सम्मिलित होने हेतु प्रेरित करें। यह पर्व हमारी संस्कृतिक विरासत है। हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम मूल भावना के बनाए रखें ताकि भावी पीढिय़ाँ गौरवान्वित हो।


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