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रोहतास के लाल ने किया कमाल; इसरो में हुआ वैज्ञानिक



जमुहार के ईशांक बने इसरो में वैज्ञानिक 

सासाराम (रोहतास) : नि.सं. 

गांव से निकलकर विश्व की सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थाओं में शुमार इसरो (isro) जैसे संस्थान में वैज्ञानिक बनकर जिले का नाम रौशन करना एक काल्पनिक कहानी जैसी लगती है। लेकिन इसे सच कर दिखाया है रोहतास जिला के डेहरी प्रखंड अंतर्गत स्थित जमुहार गाँव के ईशांक शेखर ने।  

इशांक की नियुक्ति भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वैज्ञानिक के पद पर हुई है। उनकी प्राथमिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल सासाराम में हुई थी। माध्यमिक शिक्षा सनबीम स्कूल भगवानपुर वाराणसी तथा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा सी.एच.एस. वाराणासी से हुई थी। 



अंतरिक्ष विज्ञान के अध्ययन में रूचि के कारण आई.आई.टी. की प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद इन्होंने आई.आई.टी. के बजाय भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थायन (आईआईएसटी) तिरुवनंतपुरम से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एवियोनिक्‍स) में बी. टेक. की पढ़ाई की, जहाँ से इनका चयन इसरो में हुआ है। 

ईशांक का पूरा परिवार देश सेवा की भावना से ओतप्रोत है। इनके दादाजी के. पी. सिंह भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं। इनके पिता ग़ुलाम कुन्दनम् भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए अन्ना आंदोलन से लेकर कई आन्दोलनों में भाग लेते रहे हैं और अभी आम आदमी पार्टी के रोहतास जिला प्रभारी हैं। इनके बड़े भाई शशांक शेखर ने भी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एन.डी.ए.) की प्रतियोगी परीक्षा पास की थी और अभी नौसेना अधिकारी के रुप में देश की सेवा कर रहे हैं।  

ईशांक को परिवार के इन सभी सदस्यों का मार्गदर्शन तथा माता मरियम गुरूमीत का भी भरपूर सहयोग मिलता रहा है। ईशांक देश के महान वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्‍ट्रपति भारत रत्न डाॅ. ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम को अपना आदर्श एवं प्रेरक मानते हैं। ईशांक ने इसरो में वैज्ञानिक बनकर अपने गांव, जिला और राज्य का नाम रौशन किया है।